यशवंत वर्मा केस में बड़ा फैसला! सुप्रीम कोर्ट ने FIR-SIT की मांग क्यों ठुकराई?

नई दिल्ली: पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट जज और बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़े रहे जस्टिस यशवंत वर्मा से संबंधित कथित नकदी बरामदगी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त 2026 को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने मामले में FIR दर्ज करने और कोर्ट की निगरानी में SIT जांच कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को पब्लिसिटी हासिल करने की कोशिश बताया।

यशवंत वर्मा केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा अपडेट

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने अधिवक्ता घनश्याम दयालु उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास से कथित तौर पर मिली जली हुई नकदी के मामले में FIR दर्ज की जाए और जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT बनाया जाए।

याचिका में यह तर्क दिया गया था कि जस्टिस वर्मा के पद से इस्तीफा देने के बाद मामले में आपराधिक जांच का रास्ता खुला है और कथित नकदी की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया।

क्या है जस्टिस यशवंत वर्मा कैश मामला?

यह मामला 14 मार्च 2025 को दिल्ली में जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने के बाद सामने आया था। आग बुझाने के दौरान परिसर के एक स्टोर/आउटहाउस में कथित तौर पर बड़ी मात्रा में जली हुई करेंसी मिलने की बात सामने आई थी।

मामले ने न्यायपालिका में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर देशभर में चर्चा पैदा कर दी। इसके बाद तत्कालीन CJI ने तीन सदस्यीय इन-हाउस कमेटी गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर निष्कर्ष सामने आने की बात रिपोर्टों में कही गई थी।

संसद की जांच कमेटी ने भी सौंपी रिपोर्ट

मामले में आगे चलकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। कमेटी ने 18 मई 2026 को अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी। रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों में पेश किए जाने की प्रक्रिया तय की गई थी।

जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया था इस्तीफा

जस्टिस वर्मा ने अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इसके साथ ही उनके खिलाफ चल रही हटाने की संसदीय प्रक्रिया की संवैधानिक स्थिति भी महत्वपूर्ण हो गई।

अब क्या होगा?

7 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद FIR और कोर्ट-मॉनिटरिंग SIT की मांग वाली यह याचिका खारिज हो चुकी है। हालांकि, जस्टिस वर्मा से जुड़े मामले की जांच, संसद में रिपोर्ट और न्यायिक जवाबदेही को लेकर चर्चा आगे भी बनी रह सकती है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।

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